शुक्रवार, 31 जुलाई 2009

चारधाम की यात्रा

धाम हमेशा से ही हिन्दुओं के लिए बहुत हीं पवित्र स्थल रहे हैं जहाँ जाने कि इच्छा प्रत्येक हिन्दू के दिल में पाई जाती है धाम चार हैं, यह मैंने बचपन से हीं सुन रखा था पर अक्सर इनके सही स्थान के बारे में घालमेल हो जाता था हालाकिआब मैं ये जनता हूँ कि ये चार धाम बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम एवं जगन्नाथ पूरी है उत्तर में ये चार धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हैं और पिछले ही वर्ष मुझे यहाँ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ
हम चार लोग थे पापा, मम्मी, भैया और मैं कौन किसे ले कर गया इसमे अभिभी कन्फ्यूजन है मम्मी पापा बोलते हैं कि वो हमारी वजह से गए और हमेंलगता है कि हमने धामो की यात्रा उनकी वजह से कर पाए नहीं तो कौन इस उम्र में शिमला मनाली रंगीनियों को छोड़ कर उन बर्फीले रेगिस्तानो में भक्ति भाव से जाता है कौन किसकी वजह से गया था इस बहस में न पड़ते हुए मैं आपनी यात्रा संस्मरण आप लोगों के सामने रखता हूँ

हमारी यात्रा ३० मई से shur

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