पर आप तो बड़े गर्व के साथ भारत का नया चेहरा दुनिया को दिखलाओगे पर जो देशवासी हैं उनको अपना चेहरा कैसे दिखायेंगे जब वो पूछेंगे कि हमारे भूख की कीमत पर आपने प्रत्येक खिलाडी को करोडों बाटें हैं तो क्या जवाब होगा हमारा? पब्लिक के पैसे पर जाने कितने तथाकथिक खिलाडी और (तेज़-तर्रार) ऑफिसर विदेश भ्रमण कर आते हैं और अंत में हमारे पास मेडल कितना होता है? बमुश्किल से दो या एक यह स्थिति है भारत में खेल की विश्व का सबसे बड़ा खेल आयोजन ओलंपिक में बहुत से ऐसे खेल शामिल हैं जो भारत के किये पारम्परिक हैं गाँव के बच्चे बच्चे इन खेलो में निपुण होते हैं और कितने तो शुरुवात में हीं "अंतर्राष्ट्रीय स्तर" के बराबर होंगे पर वो कैसे खेल पटल पर उभरेंगे, अगर उनका पेट महीने में १० दिन खाली रहता हो तो? बचपन में उन्होंने हाथ में गिल्ली-डंडा पकड़ने से पहले कुदाल और फावड़े पकड़ा हो तो खेलो में वो कैसे आयेंगे? वो निशाना लगते हैं चिड़ियों को मारने के लिए, जानवरों के साथ दौड़ लगाते हैं, उन्हें पकड़ने के लिए; तैरना सिखाते हैं, हर साल आने वाले बाढ़ से बचने के लिए वो घास पातहीं खाकर मजबूत हैं, उनमे तेज़ी है स्फूर्ति है किस काम के लिए? मात्र एक हीं उत्तर है इस यक्ष प्रश्न का--- ताकि वो जी सके और उम्रपर्यंत सरकार का और उसके नुमायिन्दों की सेवा कर सके जो मेरी इस बात से असहमत हों उन्हें मैं मात्र यही मशवरा देना चाहूँगा की जाओ और किसी चौराहे पर देखे उन छोटे बच्चो को जो तरह तरह के करतब दिखा कर 1-2 रुपये के लिए हाथ फैलाते हैं क्या इन बच्चो में उन्हें आपना गोल्ड मेडल नज़र नहीं आता? क्या ये अच्छे जिम्नास्टिक नहीं बन सकते हैं हम उन्हें भीख नहीं देंगे क्यों की सरकार ने प्रतिबंधित किया है या वो काम कर के नहीं कमाते या फिर वो नशा करते है इत्यादि
हम किसी खिलाडी के पदक जितने पर मालामाल बना देते हैं मैं ये बिलकुल भी नहीं कहता कि यह गलत है पर जरा सोचिये उन पैसे में 10 खिलाडी तैयार किये जा सकते हैं कि अपने जीवन में 10-10 स्वर्ण पदक जीत कर दे सकते है ऊपर से एक संतुस्ती यह भी कि आपने 10 लोगों का जीवन सुधार दिया यह सबसे बड़ी बात होती किसी के लिए भी अब जरा सोचिये जिस कॉमनवेल्थ के नाम पर 70000 करोड़ रुपये खर्च किये गए उनमे 7 लाख खिलाडी पैदा किये जा सकते थे जिनमे से सभी अगर पदक ना भी ला पाते तो भी पदक तालिका में सर्वोच्च स्थान हमारा हीं होता और अगर कुछ भी न होता तो कम से कम हम देश को 7 लाख अच्छे नागरिक तो देते
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